Saturday, January 17, 2009
Friday, January 16, 2009
मेरी पहली किताब
कुछ सपनें थे,
कुछ चाह,
कुछ इरादा भी था,
रातों में दिए सा जला,
कागज़ों पर कलम की तरह भावनाओं को रगडा....
और आज लिख बैठा हूँ,
वो,
जो हमेशा से लिखना चाहता था.
कृपया पढें और मुझे आगे भी लिखने की प्रेरणा प्रदान करें....
http://avsar-deeds.blogspot.com/2009/01
आप मेरी किताब यहाँ खरीद सकते हैं:
मन हमारा जो लिखे वो तुम्हारा
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